2026 में बिहार जमीन रजिस्ट्री, स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज की पूरी जानकारी, जमीन खरीदने पर प्रति कट्ठा कितना स्टाम्प पेपर लगता है? जानिए 2026 की ताज़ा स्टाम्प ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन फीस, शहरी-ग्रामीण दरें और पूरा कैलकुलेशन आसान भाषा में।
बिहार में जमीन खरीदने से पहले यह जानना क्यों ज़रूरी है?
✅ 1. फर्जी और विवादित जमीन से बचाव
बिहार में कई जगहों पर:
- एक ही जमीन कई लोगों को बेची जाती है
- खाता-खेसरा गलत बताया जाता है
- जमीन पर पहले से कोर्ट केस चल रहा होता है
👉 अगर आप पहले से खाता, खेसरा, नक्शा और जमाबंदी नहीं जांचते हैं, तो आप फर्जी सौदे का शिकार हो सकते हैं।
⚖️ 2. कानूनी सुरक्षा और भविष्य की परेशानी से बचाव
जमीन से जुड़े विवाद अक्सर:
- सालों तक कोर्ट में चलते हैं
- भारी वकील फीस और समय बर्बाद होता है
अगर पहले ही यह जांच लिया जाए:
- जमीन विवाद-मुक्त (Dispute Free) है या नहीं
- मालिकाना हक साफ है या नहीं
तो भविष्य में कोई कानूनी समस्या नहीं आती।

🗺️ 3. जमीन का सही नक्शा और सीमांकन जानना
बिना नक्शा देखे जमीन खरीदने पर:
- वास्तविक क्षेत्रफल कम निकल सकता है
- रास्ता, नाला या सरकारी जमीन शामिल हो सकती है
- पड़ोसी से सीमा विवाद हो सकता है
👉 प्लॉट का नक्शा और सीमांकन देखकर आप जानते हैं कि आप क्या और कितना खरीद रहे हैं।
🏛️ 4. सरकारी या गैर-कानूनी जमीन से बचाव
बिहार में कई जमीनें होती हैं:
- गैर-मजरुआ
- आम / खास
- नदी, सड़क या सरकारी परियोजना से जुड़ी
अगर जानकारी नहीं ली:
- ऐसी जमीन रजिस्ट्री के बाद भी सरकार द्वारा जब्त की जा सकती है।
🧾 5. रजिस्ट्री, म्यूटेशन और नक्शा पास कराने में आसानी
अगर जमीन पहले से:
- साफ रिकॉर्ड में हो
- ऑनलाइन बिहार भूमि पोर्टल पर दर्ज हो
तो:
- रजिस्ट्री आसान होती है
- म्यूटेशन जल्दी होता है
- घर/दुकान का नक्शा पास कराने में कोई रुकावट नहीं आती।
💰 6. सही कीमत और बेहतर सौदे का लाभ
जब आप:
- जमीन का सही क्षेत्रफल
- सड़क, लोकेशन, सरकारी योजनाएँ
- भविष्य की विकास संभावनाएँ
जानते हैं, तब:
- आप ओवरप्राइस देने से बचते हैं
- बेहतर मोल-भाव कर पाते हैं।
📉 7. निवेश को सुरक्षित और लाभदायक बनाना
बिना जांच के खरीदी गई जमीन:
- बिकने में दिक्कत देती है
- बैंक लोन में अस्वीकार हो जाती है
पूरी जानकारी के साथ खरीदी गई जमीन:
- भविष्य में अधिक मूल्य देती है
- बैंक फाइनेंस और पुनः बिक्री में आसान रहती है।
बिहार में स्टाम्प पेपर क्या होता है?
स्टाम्प पेपर बिहार सरकार द्वारा जारी किया गया एक कानूनी काग़ज़ होता है, जिसका उपयोग जमीन खरीद–बिक्री, रजिस्ट्री, एग्रीमेंट, हलफनामा (Affidavit), पावर ऑफ अटॉर्नी और अन्य कानूनी दस्तावेज़ों को वैध (Legal) बनाने के लिए किया जाता है।
सरल शब्दों में कहें तो,
👉 स्टाम्प पेपर यह प्रमाण होता है कि आपने सरकार को निर्धारित टैक्स (Stamp Duty) अदा कर दिया है।
स्टाम्प पेपर क्यों जरूरी होता है?
बिहार में बिना स्टाम्प पेपर के किया गया कोई भी समझौता या जमीन की रजिस्ट्री:
- कानूनी रूप से मान्य नहीं होती
- कोर्ट में स्वीकार नहीं की जाती
- भविष्य में विवाद का कारण बन सकती है
इसलिए स्टाम्प पेपर कानूनी सुरक्षा का सबसे अहम आधार है।
बिहार में स्टाम्प पेपर का उपयोग किन कामों में होता है?
बिहार में स्टाम्प पेपर का इस्तेमाल निम्न कार्यों में किया जाता है:
- जमीन की खरीद–बिक्री (Sale Deed)
- लीज एग्रीमेंट / किरायानामा
- पावर ऑफ अटॉर्नी
- एग्रीमेंट टू सेल
- हलफनामा (Affidavit)
- पार्टनरशिप डीड
- कोर्ट से जुड़े दस्तावेज़
बिहार में स्टाम्प पेपर कितने प्रकार के होते हैं?
1️⃣ नॉन-ज्यूडिशियल स्टाम्प पेपर
- जमीन रजिस्ट्री और एग्रीमेंट में उपयोग
- आमतौर पर ₹10 से लेकर लाखों रुपये तक का होता है
2️⃣ ज्यूडिशियल स्टाम्प पेपर
- कोर्ट केस और कानूनी कार्यवाही में उपयोग
- मूल्य कम होता है (₹2, ₹5, ₹10 आदि)
बिहार में स्टाम्प ड्यूटी क्या होती है?
स्टाम्प ड्यूटी वह सरकारी टैक्स है, जो स्टाम्प पेपर खरीदते समय दिया जाता है।
बिहार में जमीन खरीद पर सामान्यतः:
- स्टाम्प ड्यूटी: 6%
- रजिस्ट्रेशन शुल्क: 2%
👉 कुल मिलाकर जमीन की कीमत का लगभग 8% भुगतान करना होता है।

स्टाम्प पेपर कहाँ से खरीदा जाता है?
बिहार में स्टाम्प पेपर आप इन स्थानों से खरीद सकते हैं:
- रजिस्ट्री ऑफिस के पास अधिकृत स्टाम्प वेंडर
- सरकारी ट्रेज़री
- ई-स्टाम्पिंग (कुछ जिलों में उपलब्ध)
⚠️ हमेशा अधिकृत विक्रेता से ही स्टाम्प पेपर खरीदें।
क्या ई-स्टाम्प पेपर भी मान्य है?
हाँ, बिहार में ई-स्टाम्प पेपर पूरी तरह वैध है और कोर्ट तथा रजिस्ट्री ऑफिस में स्वीकार किया जाता है, जहाँ यह सुविधा उपलब्ध है।
स्टाम्प पेपर से जुड़ी आम गलतियाँ
बिना रजिस्ट्री के स्टाम्प पर दस्तावेज़ बनाना
कम मूल्य का स्टाम्प पेपर खरीदना
नकली या पुराने स्टाम्प का उपयोग
बिहार में जमीन रजिस्ट्री पर कौन-कौन से चार्ज लगते हैं?
स्टाम्प ड्यूटी वह टैक्स है जो जमीन/प्रॉपर्टी के बेचने या ट्रांसफर करने पर सरकारी रिकॉर्ड में डाक्यूमेंट को कानूनी मान्यता देने के लिए चुकाना पड़ता है।
📌 बिहार में स्टाम्प ड्यूटी की दरें आम तौर पर इस प्रकार हैं:
✔️ पुरुष खरीदार (Male Buyer): ~6.3%
✔️ महिला खरीदार (Female Buyer): ~5.7%
✔️ अन्य मामलों में सामान्य दर: ~6%
➡️ इसका मतलब है अगर जमीन की कीमत ₹10,00,000 है, तो:
- पुरुष के लिए स्टाम्प ड्यूटी = ₹10,00,000 × 6.3% = ₹63,000
- महिला के लिए स्टाम्प ड्यूटी = ₹10,00,000 × 5.7% = ₹57,000
👉 सरकार अक्सर महिला खरीदारों को छूट देती है ताकि महिलाओं के लिए संपत्ति स्वामित्व को बढ़ावा मिले।
🖋️ 2. 🏛️ रजिस्ट्रेशन शुल्क (Registration Fee)
यह शुल्क वह प्रशासनिक खर्च है जो सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में रजिस्ट्री कराने के लिए चुकाना होता है। यह आमतौर पर संपत्ति की वैल्यू के प्रतिशत में तय होता है:
✔️ पुरुष के लिए: ~2.1%
✔️ महिला के लिए: ~1.9%
✔️ सामान्य/अन्य मामलों में: ~2%
👉 यह शुल्क दस्तावेज़ को रिकॉर्ड कराने के लिए होता है और रजिस्ट्री ऑफिस द्वारा लिया जाता है।

💸 3. 🧾 सेवा शुल्क / प्रोसेसिंग चार्ज (Service & Portal Fees)
कुछ मामलों में ऑनलाइन या कार्यालय में रजिस्ट्री कराने पर छोटे सेवा शुल्क भी होते हैं, जैसे:
✔️ ऑनलाइन पोर्टल के लिए पेमेंट चार्ज: ₹50 – ₹100
✔️ सेवा/फाइलिंग शुल्क: ₹100 – ₹500
👉 ये शुल्क आम तौर पर कम होते हैं लेकिन अगर आप ऑनलाइन इंटरनेट बैंकिंग/UPI से भुगतान करते हैं तो बैंक सर्विस चार्ज भी अलग से लग सकता है।
📑 4. 🪪 अन्य सरकारी/कागज़ी खर्च (Miscellaneous Govt Fees)
रजिस्ट्री होने के दौरान अन्य आम खर्च/दस्तावेज़ शुल्क भी जुड़ सकते हैं:
✔️ दस्तावेज़ स्कैनिंग / प्रिंटिंग शुल्क
✔ रसीद/पंजीकरण कोड इश्यू शुल्क
✔ अगर एजेंट/वकील है तो उसकी फीस (सरकारी नहीं)
👉 ये खर्च ज़्यादातर ₹100 से ₹2,000 तक हो सकते हैं, पर ये राज्य/दफ्तर के अनुसार बदलते रहते हैं।
📊 5. कुल खर्च (Approx Total Gov. Charges)
🧮 अगर आप ₹10,00,000 मूल्य की ज़मीन खरीदते हैं:
| Charge Type | Approx % | Amount (₹) |
|---|---|---|
| Stamp Duty | ~5.7–6.3% | ₹57,000 – ₹63,000 |
| Registration Fee | ~1.9–2.1% | ₹19,000 – ₹21,000 |
| Service/Portal Fees | – | ₹100 – ₹500 |
| Misc Govt Fees | – | ₹100 – ₹2,000 |
👉 कुल सरकारी चार्ज ~ ₹76,000 – ₹86,000+ के बीच हो सकता है, यानी जमीन कीमत का ~8% तक।
📌 कुछ महत्वपूर्ण बातें
✅ चार्जेस गणना:
स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस आमतौर पर Circle Rate या Market Value (जो भी अधिक हो) के आधार पर की जाती है — इसलिए कभी-कभी कम बताई गई कीमत पर भी अधिक टैक्स देना पड़ सकता है।
✅ समय सीमा:
राज्य सरकार के नियम के अनुसार, आपको स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क ट्रांज़ैक्शन के 4 महीने के अंदर चुकाना ज़रूरी है, वरना जुर्माने/पेनल्टी का जोखिम हो सकता है।
✅ परिवार/विशेष मामलों में कम चार्ज:
कुछ मामलों जैसे “गिफ्ट डीड,” “फॅमिली ट्रांसफर,” आदि में छोटे शुल्क या रिबेट मिलते हैं — और यह दरें अलग-अलग हो सकती हैं।
बिहार में स्टाम्प ड्यूटी कितनी लगती है? (2026)
बिहार सरकार के नियमों के अनुसार:
- स्टाम्प ड्यूटी: 6%
- रजिस्ट्रेशन शुल्क: 2%
👉 कुल मिलाकर जमीन की सरकारी मूल्य (Circle Rate) का लगभग 8% खर्च आता है।
प्रति कट्ठा जमीन पर कितना स्टाम्प पेपर लगता है?
यह सवाल सबसे ज़्यादा पूछा जाता है। इसका सीधा जवाब है:
स्टाम्प पेपर की कीमत जमीन के मूल्य पर निर्भर करती है, न कि केवल कट्ठा पर।
उदाहरण से समझिए:
मान लीजिए:
- 1 कट्ठा जमीन का सरकारी मूल्य = ₹5,00,000
तो:
- स्टाम्प ड्यूटी (6%) = ₹30,000
- रजिस्ट्रेशन फीस (2%) = ₹10,000
👉 कुल स्टाम्प + रजिस्ट्रेशन = ₹40,000 (प्रति कट्ठा)

ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में स्टाम्प चार्ज का अंतर
| क्षेत्र | प्रति कट्ठा औसत सरकारी मूल्य | कुल स्टाम्प + रजिस्ट्रेशन |
|---|---|---|
| ग्रामीण क्षेत्र | ₹2–4 लाख | ₹16,000 – ₹32,000 |
| शहरी क्षेत्र | ₹6–15 लाख | ₹48,000 – ₹1,20,000 |
⚠️ यह दरें जिले, मौजा और सड़क कनेक्टिविटी के अनुसार बदल सकती हैं।
सर्किल रेट क्या होता है और इसका स्टाम्प से क्या संबंध है?
Circle Rate वह न्यूनतम सरकारी दर है, जिस पर जमीन की रजिस्ट्री होती है।
👉 स्टाम्प ड्यूटी हमेशा Circle Rate या डील वैल्यू (जो अधिक हो) उसी पर लगेगी।
बिहार में जमीन रजिस्ट्री के लिए जरूरी दस्तावेज़
- आधार कार्ड
- पैन कार्ड
- जमीन का खाता-खेसरा
- जमीन का नक्शा
- सेल डीड (बिक्री पत्र)
- दो गवाहों का पहचान पत्र
क्या महिला खरीदार को स्टाम्प ड्यूटी में छूट मिलती है?
👉 हाँ, बिहार में महिला के नाम पर जमीन रजिस्ट्री कराने पर कुछ मामलों में स्टाम्प ड्यूटी में छूट मिल सकती है। यह छूट समय-समय पर सरकारी आदेश पर निर्भर करती है।
स्टाम्प पेपर कहाँ से खरीदें?
- रजिस्ट्री ऑफिस के पास अधिकृत स्टाम्प वेंडर
- ई-स्टाम्पिंग (कुछ जिलों में उपलब्ध)
⚠️ हमेशा अधिकृत विक्रेता से ही स्टाम्प खरीदें।
जमीन खरीदते समय आम गलतियाँ जिनसे बचना चाहिए
- बिना Circle Rate जाने सौदा करना
- पूरा भुगतान नकद करना
- बिना रजिस्ट्री जमीन खरीदना
- फर्जी स्टाम्प पेपर का उपयोग
निष्कर्ष (Conclusion)
बिहार में जमीन खरीदते समय प्रति कट्ठा स्टाम्प पेपर का खर्च जमीन के मूल्य का लगभग 8% होता है। सही जानकारी, सही दस्तावेज़ और सरकारी नियमों की समझ से आप सुरक्षित और लाभदायक निवेश कर सकते हैं।
नीचे आपके आर्टिकल “बिहार में जमीन खरीदने पर प्रति कट्ठा कितना स्टाम्प पेपर लगता है?” के लिए एक पूरा SEO-Friendly FAQ सेक्शन दिया गया है। इसे आप सीधे अपनी वेबसाइट में जोड़ सकते हैं। यह सेक्शन Google Featured Snippet और People Also Ask (PAA) के लिए भी अनुकूल है।
❓ FAQ – बिहार में जमीन रजिस्ट्री और स्टाम्प पेपर से जुड़े सवाल
❓ बिहार में 1 कट्ठा जमीन पर कितना स्टाम्प पेपर लगता है?
बिहार में प्रति कट्ठा स्टाम्प पेपर की कीमत जमीन के सरकारी मूल्य (Circle Rate) पर निर्भर करती है। आमतौर पर जमीन की कुल कीमत का लगभग 8% (6% स्टाम्प ड्यूटी + 2% रजिस्ट्रेशन फीस) देना होता है।
❓ क्या स्टाम्प पेपर कट्ठा के हिसाब से फिक्स होता है?
नहीं। स्टाम्प पेपर कट्ठा के हिसाब से तय नहीं होता, बल्कि जमीन के मूल्य के आधार पर लगता है। अगर जमीन महंगी है, तो स्टाम्प शुल्क भी अधिक होगा।
❓ बिहार में स्टाम्प ड्यूटी कितनी है?
वर्तमान में बिहार में:
- स्टाम्प ड्यूटी: 6%
- रजिस्ट्रेशन शुल्क: 2%
कुल मिलाकर लगभग 8% शुल्क लगता है।
❓ ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्टाम्प शुल्क अलग क्यों होता है?
क्योंकि शहरी क्षेत्रों में जमीन का Circle Rate अधिक होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन सस्ती होने के कारण स्टाम्प और रजिस्ट्रेशन शुल्क भी कम पड़ता है।
❓ क्या महिला के नाम पर जमीन लेने से स्टाम्प ड्यूटी कम लगती है?
हाँ, बिहार सरकार कुछ समय पर महिला खरीदारों को स्टाम्प ड्यूटी में छूट देती है। यह छूट सरकारी अधिसूचना पर निर्भर करती है।
❓ क्या जमीन की रजिस्ट्री बिना स्टाम्प पेपर हो सकती है?
नहीं। बिना स्टाम्प पेपर और रजिस्ट्रेशन के जमीन की खरीद-फरोख्त कानूनी रूप से मान्य नहीं होती।
❓ स्टाम्प पेपर कहाँ से खरीदा जाता है?
आप स्टाम्प पेपर:
- रजिस्ट्री ऑफिस के पास अधिकृत स्टाम्प वेंडर से
- या ई-स्टाम्पिंग (जहाँ उपलब्ध हो) के माध्यम से खरीद सकते हैं।
❓ अगर सर्किल रेट और सौदे की कीमत अलग हो तो स्टाम्प किस पर लगेगा?
स्टाम्प ड्यूटी हमेशा Circle Rate या सौदे की कीमत – जो भी अधिक हो, उसी पर लगती है।
❓ जमीन रजिस्ट्री में कौन-कौन से दस्तावेज़ जरूरी हैं?
- आधार कार्ड
- पैन कार्ड
- जमीन का खाता-खेसरा
- जमीन का नक्शा
- सेल डीड
- दो गवाहों के पहचान पत्र
❓ क्या स्टाम्प शुल्क ऑनलाइन चेक किया जा सकता है?
हाँ, बिहार सरकार की राजस्व और निबंधन विभाग की वेबसाइट पर Circle Rate और शुल्क की जानकारी उपलब्ध रहती है।
❓ जमीन खरीदते समय सबसे बड़ी गलती क्या होती है?
सबसे बड़ी गलती है:
- Circle Rate चेक न करना
- बिना रजिस्ट्री जमीन खरीदना
- फर्जी या कम कीमत का स्टाम्प पेपर इस्तेमाल करना
