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Gopalganj Police: बेटी की हत्या के मामले में पुलिस ने मां को गिरफ्तार किया। गत 14 फरवरी को पुलिस ने मां जैतुन नेशा को न्यायालय में प्रस्तुत किया। मां की गिरफ्तारी के बाद पुलिस इस आपराधिक मामले को भूल गई। इसका नतीजा यह हुआ कि 90 दिनों के अंदर इस मामले में अनुसंधानकर्ता आरोप पत्र समर्पित नहीं कर सके।
पुलिस की इस बड़ी चूक का लाभ आरोपित मां जैतुन नेशा को मिल गया। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी आनंद कुमार त्रिपाठी की अदालत ने मां को इस मामले में जमानत पर छोड़ने का आदेश दे दिया।
लड़की का बरामद किया था शव
एक फरवरी 2025 की सुबह कुचायकोट पुलिस ने विशनपुरा नहर के पास एक युवती का शव बरामद किया। लड़की की गोली मारकर हत्या की गई थी। मौके से पुलिस ने तीन कारतूस भी बरामद किया था। युवती की पहचान कुचायकोट थाना क्षेत्र के ही पोखरभिंडा गांव निवासी हारून रशीद की पुत्री शबाना खातून के रूप में की गई थी।
मौके पर पहुंच Gopalganj Police ने की थी जांच
तब पुलिस की एसएफएल की टीम ने भी मौके पर पहुंचकर मामले की जांच पड़ताल की थी। पुलिस जब शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज रही थी, तब मृतका के स्वजन ने शव के पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया था। बाद में पुलिस पदाधिकारियों के समझाने के बाद शव का पोस्टमार्टम कराया गया।
Gopalganj Police स्वजन ने थाने में नहीं दिया था आवेदन
इस मामले में स्वजन ने घटना के तीन दिन बाद तक जब कोई आवेदन थाना में नहीं दिया। आखिरकार चौकीदार बाबू जान के बयान पर प्राथमिकी की गई। पुलिस अनुसंधान में यह बात सामने आई कि शबाना खातून ने कुचायकोट थाना क्षेत्र के गालिमपुर गांव निवासी पवन कुमार से कोर्ट में विवाह कर लिया था।
लड़की की मां को बताया था हत्यारा
उसके स्वजन इस अंतरजातीय विवाह के खिलाफ थे, और वह शबाना को उसके पति के घर जाने देना नहीं चाहते थे। घटना के तीन-चार दिनों पूर्व अपने कथित पति को शबाना ने इस बात की जानकारी भी दी थी। पुलिस अनुसंधान में मृतक की मां और दो बेटे ही शबाना के हत्यारे निकले।
Gopalganj Police 14 फरवरी को कोर्ट में किया था पेश
इस मामले में पुलिस ने सबाना की मां जैतून निशा को गिरफ्तार कर 14 फरवरी को संबंधित न्यायालय में प्रस्तुत किया। महिला की गिरफ्तारी के बाद पुलिस इस चर्चित मामले को भूल गई। केस में न्यायालय में निर्धारित अवधि में आरोप पत्र समर्पित नहीं किया गया।अदालत ने निर्धारित अवधि में आरोप पत्र नहीं सौंपने पर बीएनएसएस की धारा 103(1), 238 तथा 61(2) का लाभ देते हुए जैतुन नेशा को जमानत पर छोड़ने का आदेश दिया।